1.
हुए मर के हम जो रुस्वा हुए क्यूँ न ग़र्क़-ए-दरिया
न कभी जनाज़ा उठता न कहीं मज़ार होता…
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2.
ख्वाबों कॆ अंदर ज़िंदा मत रहो ..
बल्की अपने अंदर ख्वाब को ज़िदा रखो .
मोहब्बत उससॆ नही होती जो खूबसूरत हो.
खूबसूरत वो होती है जिससॆ मोहब्बत हो ...
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3.
मुझे किसी के बदल जाने का गम नही ,बस कोई था,जिस पर खुद से ज्यादा भरोसा था…
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4.
जो मज़हब की इबादत है, वो मतलब की इबादत है
करो इन्सान की ख़िदमत, यही रब की इबादत है !!
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5.
ये चाँद आसमान की सिर्फ मिट्टी नहीं हैबेदर्द निगाहों से उसका दीदार न करो ऐ मेरे गमे-दिल तू जीने का हौसला रखयूँ मौत की तमन्ना तूम सौ बार न करो
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6.
न रूठना हमसे हम मर जायेंगे,दिल की दुनिया तबाह कर जायेंगे,प्यार किया है हमने कोई मजाक नहीं,दिल की धड़कन तेरे नाम कर जायेंगे.
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7.
तुमसे मिलकर हो गया जिंदगी से प्यार, अब हमें छोड़कर मत जाना मेरे यार, बिन तेरे हम जी ना पाएँगे तुम ना होंगे तो हम उल्लू किसे बनाएँगे.
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8.
रौशनी में कुछ कमी रह गई हो तो बता देना ।
दिल आज भी हाजिर है जलने को … ।।
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9.
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं,
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है….!!
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10.
तेवर तो हम वक्त आने पे दिखायेंगे ,,
शहर तुम खरीदलो उस पर हुकुमत हम चलायेंगे…!!!
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11.
लहू लोहान करने के इरादे था तीर चलाया उसने
अपने हुस्न का जहर मेरे ज़िस्म मे फैलाया उसने
छोड चुके थे उम्मीद उनको हमसफर बनाने की
बेवफाई का इलज़ाम दे के कब्र मे है सुलाया उसने
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12.
पूरी बोतल ना सही कम से कम एक जाम तो हो जिनकी याद में हम बीमार पड़े हैं कम से कम उन्हें जुकाम तो हो.
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13.
मिट्टी के घरोंदे है, लहरों को भी आना है,ख्बाबों की बस्ती है, एक दिन उजड़ जाना है,टूटी हुई कश्ती है, दरिया पे ठिकाना है,उम्मीदों का सहारा है,इक दिन चले जाना है,बदला हुआ वक़्त है, ज़ालिम ज़माना है,यंहा मतलबी रिश्ते है, फिर भी निभाना है,वो नाकाम मोहब्बत थी, अंजाम बताना है,इन अश्कों को छुपाना है, गज़ले भी सुनाना है,इस महफ़िल में सबको, अपना ही माना है.
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14.
सुनेहरी धूप बरसात के बादथोरी सी हँसी हेर बात के बादउसी तरह हो मुबारक आप को क्रिस्मस का त्योहार !! मेर्री क्रिस्मस !!
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15.
उनके शहर में अपना भी आशियाँ होता, रोक लेते जो उसदिन वो हमे जाने से, उन्हें मालूम था रूठना हमारी आदत है , न जाने क्यूँ मुकर गये हमे मनाने से |
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16.
हर नज़र को एक नज़र की की तलाश है,
हर दिल में छुपा एक एहसास है |
आप से प्यार युही नही किया हमने क्या करे हमारी पसंद ही कुछ ख़ास है
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17.
ख़यालों की ये शोखियाँ माफ हो
हरदम तुम्हें सोचती है
जब होश में होता है जहां
मदहोश ये करती है
आँखों की गुस्ताखियाँ…
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