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 1.

मजदुर ऊँचाई की नींव हैं
गहराई में हैं पर अंधकार में क्यूँ
उसे तुच्छ ना समझाना
वो देश का गुरुर हैं
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

2.
कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे हैं,
कुछ लोग हम पर दिल हार बैठे हैं,
इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये,
कुछ इस पार तो कुछ उस पार बैठे हैं.
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

3.
ज़हासे तेरी बादशाही खत्म होंती हे ,वहा से मेरी नवाबी सुरु होती हे….!!!
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

4.
हम से खुल जाओ ब-वक़्त-ए-मय-परस्ती एक दिन
वर्ना हम छेड़ेंगे रख कर उज़्र-ए-मस्ती एक दिन…
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

5.
सफलता के मार्ग में योगदान अनमोल हैं
चाहे हो मालिक या कोई नौकर
कोई ईकाई तुच्छ नहीं
सबका अपना मान हैं
कहने को एक छोटा लेबर ही सही
पर उसी को रास्ते का ज्ञान हैं
घमंड ना करना इस ऊंचाई का कभी
तेरे कंधो पर इनके पसीने का भार हैं
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

6.
चाँद की पूजा करके, करती हूँ मैं,तुम्हारी सलामती की दुआ..तुझे लग जाये मेरी भी उमर,गम रहे हर पल तुझसे जुदा..
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

7.
कई फूलों से चेहरे आ गये मेरी इबादत में
निगाहों में बहारों का मैं वो एहसास रखता हूँ
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

8.
निहारूं तुम्हारी जब भी फोटो,उसमें मुस्कान नज़र आती।उस मुस्कान में मैं खो जाता,तो तेरी सूरत ही नज़र आती।याद में तुम्हारी मेरे, नयनों में जल भर आता,हे माँ तुम्हारे न होने की, कमी नज़र आती।
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

9.
रिश्ता हमारा इस जहां में सबसे प्यारा हो
जैसे जिंदगी को सांसों का सहारा हो
याद करना हमें उस पल में
जब तुम अकेले हो और कोई ना तुम्हारा हो
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

10.
उसको रुखसत तो किया था, मुझे मालून न था.

सारा घर ले गया, छोड़ के जाने वाला.....
🌹🍁🌳🌲🍃🌿🌸🎋🍂🎍🍀

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